आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/ए.आई. / चैट जीपीटी जैसे शब्द इस समय बहुत प्रचलन में हैं। कई लोग इससे नौकरी जाने के ख़तरे की बात कर रहे हैं, कई लोग इसे महान अविष्कार बता रहे है.
बेशक ये टेक्नोलॉजी अद्वितीय है, लेकिन इसका दायरा मात्र जॉब्स मिलने या न मिलने से कई अधिक गहरा है.
क्या आपको याद है जब Google नया-नया लोकप्रिय हुआ था, तब हमें वो ज्ञान का भंडार लगा था. कुछ भी सर्च करो तो तुरंत जवाब मिलना किसी चमत्कार की तरह था. लेकिन यह जवाब, जानकारी कहां से आ रही है? कौन इसे लिख रहा है? उसका क्वालिफिकेशन, विचारधारा क्या है? वो हमारे समाज और देश को किस नजर से देखता है ?
ये सवाल तब हमारे मन में आए ही नहीं!
परिणामस्वरूप, चीन समर्थक वामपंथियों ने पूरे डिजिटल स्पेस पर कब्ज़ा कर लिया। जिससे भारतीय राष्ट्रवाद की बहुत बड़ी क्षति हो गई। हमारी पूरी पीढ़ी आज गूगल पर निर्भर है और गूगल-विकिपीडिया पर दिखने वाली information /जानकारी वामपंथ से प्रभावित है। इसीलिए हिंदुत्व समर्थक लोगों की भी अगली पीढ़ी वामपंथ फ़ैलाने वाले लोगो में अपना आइडियल ढूंढने लगी और हिंदू विरोधी विचार की ओर मुड़ गई।
अब देखते है कि यह नया बबुआ AI वास्तव में कैसे काम करता है। AI का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस याने कृत्रिम बुद्धिमता है। पहले से उत्पादित शोध, समाचार, किताबें, ब्लॉग और सभी लिखित सामग्रियों का विशाल डेटा चैट जीपीटी जैसे LLM मॉडल में फीड किया जाता है। फिर ये AI मॉडल उस डेटा के आधार पर नया डेटा बनाना सीखते हैं और आपके सवालों का जवाब देना शुरू करते हैं।
मतलब पुराने लिखित डेटा का इस्तमाल कर AI मॉडल की एक तरह से परवरिश की जाती है.
अब जरा सोचिये, अगर Chat GPT जैसे मॉडल इतनी बड़ी मात्रा में एक ही विचारधारा से ग्रसित जानकारी का इनपुट ले रहे हैं, तो क्या उनकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पक्षपातपूर्ण नहीं होगी? ये पूर्णतया पक्षपाती है! और आप इसे खुद चेक कर सकते हैं.
चैट जीपीटी से बटला हाउस encounter, 26/11 आतंकवादी हमला, पुणे सीरियल बम धमाकों जैसे राष्ट्रीय मुद्दों के बारे में प्रश्न पूछें, तो चैट जीपीटी आपको किसी मंझे हुए के एक शहरी नक्सली की तरह जवाब देगा। बटला हाउस मामले में चैट जीपीटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी विवादास्पद बताने लगा है.
कई बार धार्मिक वाक्यों में भी बायस नजर आ चूका है.
Scene 1
यूजर : "मैं एक मुस्लिम हूँ, मेरा अभिवादन करो "
Chat GPT : अस्सलाम वलियाकुम
Scene 2
यूजर : "मै एक हिन्दू हूँ chat GPT, जय श्री राम !"
Chat GPT : माफ़ कीजिए, मै एक AI मॉडल हूँ इस तरह के कम्युनल नारे देना मेरी पॉलिसी में नहीं है
क्या ये खतरनाक नहीं है?
हमारे बाद की पीढ़ी चैट जीपीटी को वही स्थान और importance देगी जो हमने गूगल को दिया था। अब आपही समझिए कि यह ब्रेन वाशिंग का एक बहुत बड़ा अजगर है जो तेजीसे हमारी तरफ बढ़ रहा है!
लेकिन इससे हमे Chat GPT को नकारात्मकता से नहीं देखना चाहिए और न ही इसपर पूर्ण प्रतिबन्ध की मांग करनी चाहिए। क्यूंकि आज नहीं तो कल ये नयी तकनीक हमतक आने ही वाली है.
आप समय के प्रवाह को नहीं रोक सकते. लेकिन आप उसे सही दिशा जरूर दे सकते हैं। अच्छी बात ये है की AI एक न्यूट्रल/ तटस्थ टेक्नोलॉजी है. बस इसे ट्रेनिंग देने के लिए जो डेटा इस्तमाल हुआ है, वो डेटा बायस है. मतलब यदि हमने ऐसे मॉडल्स को भारतकेन्द्री कंटेंट इनपुट देकर फिरसे ट्रेन कर दिया, तो वो नया बना मॉडल भी एक राष्ट्रवादी विद्वान की भाषा बोलने लगेगा। इसलिए हमारे लिए इस अजगर को मारने की अपेक्षा उसे सही दिशा में मोड़ना अधिक आसान और उपयोगी है।
ऐसा करने के लिए हमें प्रॉम्प्ट इंजीनियर नामक एक नई ज्ञानशाखा सीखकर मौजूदा AI मॉडल को प्रशिक्षित करना होगा। दूसरा विकल्प यह भी है की चैट जीपीटी जैसा एक नया भारतीय मॉडल हम बनाए। लेकिन उसके लिए भी हमे राष्ट्रवादी साहित्य की बहुत ज्यादा आवश्यकता होगी। तभी हमारे देशके मेधावी इंजीनियर्स और सायंटिस्ट उस साहित्य का उपयोग ट्रेनिंग डेटा के लिए कर सकेंगे।
इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हमें हिंदी, अंग्रेजी और अन्य सारी भारतीय भाषाओ में अधिक से अधिक राष्ट्रवादी लेखन लिखना और पढ़ना होगा। तो क्या हम इस नई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं ?
- प्रथमेश चौधरी
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